गर्भाशय में शुक्राणु कैसे प्रवेश करता है?HealthPlanet

Posted on Sun 9th Oct 2022 : 19:32

गर्भाशय में शुक्राणु कैसे प्रवेश करता है?
संभोग (सेक्स) के दौरान क्या होता है?
संभोग (सेक्स) के दौरान मिलने वाले आनंद के साथ-साथ आपके शरीर में तनाव भी बढ़ रहा होता है, जो कि चर्मोत्कर्ष पर पहुंचकर समाप्त होता है। चरम आनंद पर पहुंचना भी एक महत्वपूर्ण जैविक प्रक्रिया है। पुरुषों में चर्मोत्कर्ष शुक्राणुओं से भरपूर वीर्य को योनि में डालता है और यह करीब 10 मील प्रति घंटे की दर से ग्रीवा की तरफ जाता है। वीर्यपात की तेजी शुक्राणु को अंडे तक पहुंचने के लिए एक अच्छी शुरुआत देती है।

गर्भाधान के लिए महिला का चर्मोत्कर्ष पर पहुंचना जरुरी नहीं है। गर्भाशय के हल्के संकुचन भी शुक्राणु को आगे ले जाने में मदद कर सकते हैं, मगर ये संकुचन चर्मोत्कर्ष पर पहुंचे बिना भी होते हैं।

बहुत से दंपत्ति यह सोचते हैं कि क्या संभोग की कोई विशेष अवस्था गर्भाधान के लिए बेहतर होती है। इस बात का निश्चित जवाब किसी के पास नहीं है। संभोग के लिए सबसे महत्वपूर्ण यह है कि आप दोनों इसका आनंद लें और नियमित रूप से प्रेम संबंध बनाएं।

ऐसा नहीं है कि सभी महिलाएं मासिक चक्र के मध्य में डिंबोत्सर्जन करें या फिर मासिक चक्र में हर महीने उसी समय ओव्यूलेट करें। गर्भाधान की संभावनाओं को बढ़ाने के लिए अपने पूरे मासिक चक्र के दौरान हर दूसरे या तीसरे दिन संभोग करने का प्रयास करें।
संभोग के बाद जब आप आराम करते हैं, शुक्राणु अपने काम पर लग जाते हैं।
इस समय पर आप ज्यादा कुछ नहीं कर सकते, बस आशा करें कि आप गर्भधारण कर लें। सेक्स के बाद जब आप और आपके पति एक दूसरे से आलिंगनबद्ध होकर प्यार जता रहे होंगे, आपके शरीर के अंदर उस समय काफी कुछ चल रहा होगा। उन लाखों शुक्राणुओं ने डिंब को ढूंढ़ने की तलाश शुरु कर दी होगी, और यह कोई आसान यात्रा नहीं होती है।

इसमें सबसे पहली रुकावट आपकी ग्रीवा का श्लेम हो सकता है, जो कि आपके अजननक्षम दिनों में अभेद्य जाली की तरह प्रतीत हो सकता है। हालांकि, जब आप सर्वाधिक जननक्षम (फर्टाइल) होती हैं, तो यह श्लेम चमत्कारिक ढंग से ढीला पड़ जाता है, ताकि सबसे मजबूत तैराक शुक्राणु इसके पार जा सके।

जो शुक्राणु अब भी जीवित बच जाते हैं, उन्हें अभी भी लंबी यात्रा तय करनी होती है। कुल मिलाकर उन्हें ग्रीवा से होते हुए गर्भाशय से डिंबवाही नलिकाओं तक पहुंचने में करीब 18 सें.मी. यात्रा करनी पड़ती है।

यह सोचा जाए कि ये शुक्राणु हर 15 मिनट में करीब 2.5 सें.मी. की दर से सफर करते हैं, तो यह एक लंबी यात्रा प्रतीत होती है। सबसे तेज तैराक शुक्राणु कम से कम 45 मिनट में अंडे को ढूंढ़ सकता है। वहीं, सबसे धीमे तैराक को इसमें 12 घंटें तक लग सकते हैं। अगर शुक्राणु को संभोग के समय फैलोपियन ट्यूब में अंडा नहीं मिलता, तो वे आपके शरीर के अंदर सात दिनों तक जीवित रह सकते हैं। इसका मतलब यह है कि यदि आप इस समयावधि के दौरान ओव्यूलेट करें, तो आप गर्भधारण (कंसीव) कर सकती हैं।

शुक्राणु की मृत्यु दर काफी ज्यादा है और केवल कुछ दर्जन शुक्राणु ही अंडे तक पहुंच पाते हैं। बाकि बचे शुक्राणु कहीं फंस जाते हैं, गुम हो जाते हैं (शायद गलत फैलोपियन ट्यूब में चले जाते हैं) या फिर रास्ते में ही मृत हो जाते हैं।

कुछ भाग्यशाली शुक्राणु जो अंडे के पास पहुंच जाते हैं, उनके लिए भी दौड़ अभी समाप्त नहीं हुई है। हरेक को डिंब की बाहरी परत को व्यग्रतापूर्वक भेदना होता है और दूसरों से पहले अंदर जाना होता है। अंडे को बाहर निकलने के बाद 24 घंटे के भीतर निषेचित होना होता है।

जब सबसे बलशाली शुक्राणु अंडे तक पहुंच जाता है, तो डिंब में तत्काल बदलाव आता है, ताकि कोई अन्य शुक्राणु अंदर प्रवेश न कर सके। यह एक सुरक्षा कवच की तरह होता है, जो कि पहले शुक्राणु के सुरक्षित भीतर पहुंचते ही तुरंत डिंब को पूरी तरह आवरित कर लेता है।

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